| Size | US | UK / AUS | France | Italy | Japan | Denmark |
|---|---|---|---|---|---|---|
| XS | 0-2 | 6 | 34 | 38 | 5 | 32 |
| S | 2-4 | 8 | 36 | 40 | 7 | 34 |
| M | 6-8 | 10 | 38 | 42 | 9 | 36 |
| L | 8-10 | 12 | 40 | 44 | 11 | 38 |
Description
Agnitundi Vatti
Agnitundi Vati :- अग्नितुण्डी वटी एक पारंपरिक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी नुस्खा है जो स्वस्थ पाचन को बढ़ावा देता है और पाचन तंत्र के संपूर्ण कल्याण का समर्थन करता है। इस जड़ी-बूटी सप्लीमेंट में प्रभावी सामग्री के संयोजन से बनाया जाता है, जो आपके पाचन अग्नि को बढ़ाने में मदद करता है, जिसे उचित पाचन और पोषण को सही रूप से पचाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
Key Benefits :
- पाचन सुधारः अग्नितुंदि वटी पाचन एंजाइम्स के उत्सर्जन को प्रोत्साहित करके खाद्य के विघटन और पाचन को सुगम बनाने में मदद करती है। यह पेट में उभरने वाली सामान्य पाचन समस्याओं जैसे ब्लोटिंग, गैस और पाचन की समस्याओं को कम करती है।
- एसिडिटी को दूर करती है: अग्नितुंदि वटी में प्राकृतिक सामग्री में ठंडक देने वाले गुण होते हैं, जो पेट की परत को शांत करते हैं और एसिडिटी और हार्टबर्न को कम करते हैं। इससे पेट में एक स्वस्थ pH संतुलन को बनाए रखा जाता है, जिससे आपको तकलीफ और जलन कम होती है।
- पोषक तत्वों को अवशोषण का समर्थनः पाचन प्रक्रिया में सुधार करके, अग्नितुंदि वटी आपके खाद्य से आवश्यक पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करती है। इससे आपके शरीर को समग्र स्वास्थ्य और ऊर्जा प्राप्त होती है।
- विषैले पदार्थों का निकालना समर्थनः अग्नितुंदि वटी में पाए जाने वाले जड़ी-बूटियों का मिश्रण शरीर से विषाक्त पदार्थों को हटाने का समर्थन करता है, जिससे शरीर में विषाक्ति की प्रक्रिया में मदद मिलती है। यह पाचनतंत्र को शुद्ध करने में मदद करता है और एक स्वस्थ पेट माहौल बनाए रखने में मदद करता है।
- वात और पित्त को संतुलित करता है: अग्नितुंदि वटी को आयुर्वेद के अनुसार वात और पित्त दोषों पर संतुलनपूर्ण प्रभाव होता है। इससे अधिक वात और पित्त को शांत करने की मदद मिलती है, जो स्वास्थ्य और सुख की स्थिति को संतुलित करता है।
Ingredients (Composition): Each pill contains 1 part,
- ajwain (Trachyspemum ammi) (Fr.) Hairtaki (Terminalia chebula) (P.), Bibhitaki (Terminalia pellicle) (P.), Amalki (Emblica Officinalis) (P.), Chitrak (Plumbago zeylamica) (RI.), Sveta Jeera (Tuminim cyrrinum) (Fr.), Vaividang (Embella tribes) (Fr.), Sarjkshar, Yavkshar, Sainghav, Namak (Rock Salt), Sauvarchal Namak (Black salt), Sudhh vasnav (Aconitum ferrous) (Rt.), Sudhh Tankan, Samuntri Namak (Sea salt), Shuddh Parad, Shuddh Gandhak and 16 part of Shuddh Kunchla (Strychnos nus vomica) (Enm.)
Processed with: Nimbu ras (Citrus lemon) (Fr.), Q.S.
Directions For Use:
- One to two tablets twice a day or as directed by the ayurvedic physician.
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